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"वैराग्य की बेरहमी|एंजेल का दर्द"

एंजेल की आंखें इंसान पर टिक चुकी थीं और उसे इंसान को देखकर वो और भी ज्यादा रोने लगी। इधर वो आदमी दर्द से तड़प रहा था। बॉडीगार्ड उसे खींचते हुए बाहर ले जा चुके थे और अब कमरे में सिर्फ और सिर्फ वैराग्य की कड़ी निगाहें एंजेल पर टिकी थीं।

पहले तो उसके साथ जो हुआ था उसकी वजह से वो घबराई हुई थी, लेकिन वैराग्य को वहां देखकर और उसकी कड़ी निगाहें देखकर उसे ऐसा लगा कि डर की वजह से उसे किसी भी वक्त वॉमिटिंग हो जाएगी। उसने बहुत कसकर बेडशीट को पकड़ रखा था, उसकी छोटी-छोटी मुट्ठियां बंद थीं और उसके छोटे-छोटे होंठ आपस में दबे हुए थे। बड़ी-बड़ी, गहरी आंखें इस वक्त डर से वैराग्य को ही देख रही थीं।

लेकिन तभी वैराग्य जोर से चिल्लाया, "तुमने ऐसा क्यों किया? तुम्हारी औकात कैसे हुई मेरे घर से भागने की?"

उसके चिल्लाने पर एंजेल लगभग हवा में उछल गई, वो डर से बुरी तरह कांपने लगी और कांपते हुए अपने साइन लैंग्वेज में कुछ समझाने की कोशिश करने लगी। लेकिन वैराग्य इस वक्त कुछ भी सोचने समझने की हालत में नहीं था, वो बहुत गुस्से में था। वो एंजेल की तरफ बढ़ा और उसके सिल्की बालों को बेरहमी से पकड़ लिया।

एंजेल की आंखों में दर्द उभर आया। वो चिल्लाना चाहती थी, लेकिन वो चीख नहीं सकती थी, लेकिन उसकी आंखें जरूर दर्द में सिकुड़ रही थीं क्योंकि वैराग्य ने बहुत बेरहमी से पकड़ रखा था। वो वैराग्य को कंधे से दूर करने लगी, उसके छोटे-छोटे हाथ लंबे चौड़े वैराग्य को एक इंच भी दूर नहीं कर पा रहे थे।

शराब की तरह ठंडी आवाज में वैराग्य बोला, "तुमने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी और पहली गलती की। तुम्हें मेरे कैद से भागना नहीं चाहिए था। तुमसे मैं शादी कर चुका था और कल तुम्हें दुनिया के सामने पेश करने वाला था, लेकिन तुमने अपनी औकात दिखा दी। अब मैं तुम्हें अपनी औकात दिखाऊंगा। मैं तुम्हें बताऊंगा कि मैं कितना खतरनाक इंसान हूं। जब बात मेरे अधिकार की आती है, तो मैं किस हद तक गिर सकता हूं। तुम मुझसे दूर भागकर मेरा हो चैलेंज दे चुकी हो, और चैलेंज में मैं जरूर जीतूंगा।”

इसी के साथ वो उसे बालों सहित घसीटते हुए बाहर की तरफ लेकर जाने लगा और इधर एंजेल फूट-फूट कर किसी बच्चे की तरह लगने लगी। वो लगातार अपने आप को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हुआ। वैराग्य उसे सीधे खींचते हुए कार की तरफ लेकर आया और उसे कार में ही पटक दिया। छोटी सी एंजेल उसमें उछल गई और दर्द में खुद को समेटे रही।

वैराग्य खुद ड्राइविंग सीट पर आया और गुस्से के साथ कार स्टार्ट करते हुए बोला, "अभी तक तुमने असली कैद नहीं देखी थी, पर अब तुम असली कैद देखोगी। मैं वादा करता हूं तुम्हें अब रोशनी भी देखने को नसीब नहीं होगी।"

वैराग्य की ऐसी बातें सुनकर एंजेल का दिल दहल उठा, वो बहुत ज्यादा डर गई थी। डर की वजह से उसके होंठ कांप रहे थे, जिससे आवाज निकल रही थी। वो कांपते हुए मन में बोली, "ये इंसान मेरे साथ क्या करने जा रहा है? ये साइको इंसान मेरे साथ कुछ भी कर सकता है। मुझे बहुत डर लग रहा है। डैडी प्लीज मुझे बचाओ। प्लीज डैडी प्लीज, डैडी आप जहां कहीं भी हो प्लीज अपनी एंजेल की हेल्प करो। आपकी एंजेल एक साइको के बीच में फंस गई है। प्लीज डैडी प्लीज मेरी हेल्प कीजिए।" वो लगातार रो रही थी।

लेकिन वैराग्य ने अब कार की स्पीड और बढ़ा दी। वो बैक मिरर से उसे देखकर दांत पीसते हुए बोला, "तुम्हें एहसास भी है अगर मैं थोड़ा भी लेट किया होता तो वो तुम्हारे साथ क्या कर चुका होता? जब तुम्हें पता है कि तुम अभी इंडिया में नई-नई आई हो, तुम्हें नहीं पता कि इंडिया में कैसे-कैसे लोग रहते हैं, तो तुम्हें क्या जरूरत है बिना किसी कार्ड के बाहर निकलने की? पर तुम तो मुझसे दूर भागना चाहती थी, इसलिए तुम ऐसे बाहर निकली। लेकिन अफसोस की बात है कि तुम्हारा प्लान फेल हो गया और अब तुम ऐसी कैद में जाओगी जहां से तुम जिंदगी में कभी बाहर नहीं आ पाओगी और तुम्हारे दिमाग से भागने का ख्याल भी निकल जाएगा।"

एंजेल अपने साइन लैंग्वेज में कुछ फिर से कहने लगी, जैसे वो कहना चाहती हो कि उसे माफ कर दो, वो दोबारा ऐसी कोई गलती नहीं करेगी, प्लीज उसे कोई पनिशमेंट मत देना, उसे बहुत डर लग रहा है, उसे बेचैनी हो रही है, घबराहट हो रही है, किसी से माफ कर दो।

लेकिन वैराग्य ने उसकी हर एक साइन लैंग्वेज को इग्नोर किया और अपनी कार की स्पीड 4* बढ़ा दी। एंजेल को अब कार में भी डर लग रहा था। उसने बहुत कसकर सीट बेल्ट पकड़ रखा था और रो रही थी।

लेकिन वैराग्य का गुस्सा उसके रोने से भी शांत नहीं हो रहा था, बल्कि समय के साथ बढ़ रहा था। तभी एंजेल ने देखा कि एक दूसरे प्राइवेट विला के बाहर वैराग्य ने कार रोक दी है। ये वो घर नहीं था जहां वो अभी तक रह रही थी, वो यहां पहले से नहीं था। इस वजह से उसने तुरंत वैराग्य को न समझ में देखा।

वैराग्य गुस्से से बाहर निकला, उसने डोर ओपन किया और उसके गर्दन को पकड़ते हुए सीधे एंजेल को अपने कंधे पर उठा लिया। छोटी सी एंजेल उसके कंधे पर और भी ज्यादा छोटी लग रही थी। एंजेल अपने हाथ-पैर पटकने लगी, वो जोर-जोर से वैराग्य के पीठ पर मारने लगी।

लेकिन वैराग्य उसे लेकर सीधे बेसमेंट में जाने लगा। चारों तरफ अंधेरा था। ये देख कर एंजेल और भी ज्यादा रोने लगी। वो रोते हुए इधर-उधर देखने लगी, पर उसे ठीक से कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।

लेकिन तभी थोड़ी देर में वैराग्य रुका और दूसरे ही पल उसे जमीन पर पटक दिया। एंजेल अंधेरे में दर्द में तड़प उठी और तुरंत घबराकर आसपास देखने लगी, पर उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। चारों तरफ अंधेरा था। उसे बहुत घबराहट हुई। वो मन में रोते हुए बोली, "ये इंसान पागल हो गया है, ये मुझे अंधेरे में लाकर कौन सी पनिशमेंट देगा? मुझे बहुत डर लग रहा है, प्लीज गॉड मेरी हेल्प कीजिए। प्लीज, मैं इतनी भी कौन से बुरे काम किए थे? मैंने तो कभी किसी का बुरा भी नहीं किया था। जितना आप मेरे साथ कर रहे हैं, प्लीज मेरी हेल्प कीजिए, गॉड प्लीज मेरी हेल्प कीजिए।"

अभी वो ये सब रोते हुए मन में कह रही थी कि तभी वहां पर एक कैंडल जल गई। उसे कैंडल की रोशनी को देखते ही जैसे ही एंजेल ने चारों तरफ का नजारा देखा, उसके पैरों तले जमीन खिसक गई और वो बस दंग रह गई।

उसकी आंखों से एक बार फिर से आंसू गिरने लगे और वो बहुत ज्यादा घबराहट के साथ अपनी जगह से खड़ी हुई। वो दौड़ते हुए आगे की तरफ आ ही रही थी कि तभी वैराग्य, जिसके हाथ में सिर्फ एक कैंडल मौजूद थी, वो तिरछी स्माइल के साथ बोला, "कोशिश करना बेकार है क्योंकि तुम अब इस कैद से बाहर नहीं आ पाओगी। और हां, तुम्हें सिर्फ यही एक कैंडल दी जाएगी। इसी कैंडल के सहारे अब तुम्हें अपना वक्त बिताना होगा और अगर ये कैंडल खत्म हो जाती है तो तुम्हें अंधेरे को ही दोस्त बनाना पड़ेगा।"

ये सुनकर और खुद को छोटे से पिंजरे में कैद देखकर, एंजेल के पैरों तले जमीन खिसक गई और वो बस उस पागल साइको इंसान को ही देखती रह गई। जिसने उसे एक छोटे से पिंजरे में अब कैद कर लिया था।

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