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जिद, पागलपन, जुनून, तड़प

उसकी ये बात सुनकर आरोही बिल्कुल शॉक हो गई। वो बस एकटक उसे देखने लगी। तभी साशा नीचे झुकी और उसे कंधे से पकड़कर सोफे पर बिठाया। वो प्यार से बोली,

“आरोही, मैंने कभी ऐसा नहीं सोचा था कि तुम मेरे कदमों में गिरो। यहाँ तक कि जब मैं तुम्हें पसंद भी नहीं करती थी, तब भी मैंने ये नहीं सोचा कि तुम मेरे आगे गिड़गिड़ाओ, हाथ जोड़ो या मेरे कदमों में गिरो। भला मैं तुम्हें अपने कदमों में क्यों गिरने दूँगी? बाय द वे, मुझे खुशी हो रही है कि तुम किसी से मिलकर बहुत खुश हो।”

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