
उस आवाज को सुनते ही जैसे ही साशा और रॉबिन ने गेट की तरफ देखा, उन दोनों के एक्सप्रेशंस बदल गए। रॉबिन ने दूसरे ही पल कहा, “मोहनी आंटी, एक्चुअली हम बस बातें कर रहे थे।”
लेकिन दूसरे ही पल मोहनी अंदर आते हुए बोली, “क्या तुम दोनों पागल हो चुके हो? ऐसी बातें खुलेआम कौन करता है? अभी अगर मेरी जगह गलती से भी दावंश या युवराज होते, तो क्या होता? अगर हम दोनों में से किसी को भी ये पता चल जाता कि तुम्हारा एक बेबी भी था, जो तुम्हारे पेट में ही मर गया था, तो क्या होता? साशा, तुम्हें एहसास भी है? युवराज तो तुम्हें कुछ नहीं कहता, वो तो तुम्हें एक्सेप्ट कर ही लेता। लेकिन दावंश तो तुम्हारी शक्ल भी नहीं देखता। बेटा, तुम आखिर ऐसा क्यों कर रही हो? पहले तो तुम इस घर में चली आई और अब अपने उस मरे हुए बेबी के बारे में ऐसे खुलेआम बात कर रही हो। रॉबिन, तुमसे तो मुझे ऐसी उम्मीद नहीं थी।”




















Write a comment ...