
जैसे ही व्यांश ने यह बात बोली, सबकी नजर तुरंत पीछे की तरफ चली गई। वहां सबसे दूर अकेली खड़ी दुआ को देखकर सब हैरान रह गए। हरीश और राकेश के चेहरे का रंग उड़ गया, आरुषि दंग रह गई और दूर खड़ा निश्चय भी दुआ को देखने लगा। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि व्यांश क्या कहना चाहता है।
तभी अनन्या ने कहा, "व्यांश, तुम्हारी दुल्हन मैं हूं। देखो, मैं मंडप में वरमाला लेकर खड़ी हूं, मेरे पास आओ। तुम यह क्या बोल रहे हो?"




















Write a comment ...