
यशवर्धन की बातों को सुनकर सयांश उसे टुकुर-टुकुर देखने लगा। तभी आईना की आँखें खुलने लगीं। उसने कसमसाते हुए आँखें खोलीं तो बाप-बेटे को इस तरह देख वह चौंक गई। उसने हड़बड़ाकर कहा, "मिस्टर यश, आप यहाँ क्या कर रहे हैं? आप अभी तक गए क्यों नहीं? अगर किसी ने आपको मेरे और सयांश के साथ देख लिया तो प्रॉब्लम हो जाएगी। आप अभी के अभी यहाँ से जाइए।"
यशवर्धन ने भौहें चढ़ाते हुए कहा, "मैं कहीं नहीं जाऊंगा। मेरा बेटा मुझे देख रहा है, शायद यह मेरी गोद में आना चाहता है।" इसी के साथ उसने सयांश को उठा लिया। सयांश बिना किसी रिएक्शन के उसे ही देखे जा रहा था।




















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