सुबह का वक्त था। आईना, ईयांशी और सयांश के साथ गार्डन में थी। ईयांशी घुटनों के बल चल रही थी और सयांश उसके पीछे दौड़ रहा था। आईना उन दोनों को देखकर मुस्कुरा रही थी, तभी वहां अमायरा आई और गुस्से में बोली, "दीदी, आप अपने दोस्त को समझा लीजिए वरना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा!"
अचानक उसकी आवाज सुनकर आईना ने उलझन में पूछा, "क्या हुआ? तुम इतना गुस्सा क्यों कर रही हो और ईशान पर क्यों भड़क रही हो? क्या किया उसने?"




















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