
अगली सुबह,
राउंड शेप बेड पर सूरज की रोशनी सीधे खनक के चेहरे पर पड़ रही थी। गहरी नींद में सो रही खनक की पलकें रोशनी की वजह से धीरे-धीरे फड़फड़ाने लगीं। कुछ ही सेकंड में उसने अपनी आंखें खोल दीं और खुद से बुदबुदाई, "गुड मॉर्निंग खनक! चलो, फिर से अपनी बेबी-सिटर की ड्यूटी पर निकल जाओ।"





















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