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अगली सुबह का वक्त था और पूरे पहाड़ी इलाके में एक अलग ही चहल-पहल मची हुई थी। कुछ स्टूडेंट्स सभी के टेंट में जाकर उन्हें चाय और नाश्ता दे रहे थे, तो कुछ पहले ही एक्सरसाइज कर रहे थे। ठंडी हवाएं चल रही थीं और पहाड़ का मौसम और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था। तभी शिवम ने दानिश के टेंट को धीरे से हिलाते हुए कहा, "दानिश क्या तू जाग रहा है? देख मुझे लगता है कि अब तुझे उसे छोड़ देना चाहिए। सुबह हो चुकी है, क्या तू उसकी जान लेकर मानेगा?"




















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