
विरांश खनक की तरफ कदम बढ़ाते हुए बोला, "तो फाइनली तुम्हें समझ आ ही गया,
लेकिन अफसोस की बात ये है कि तुम मेरा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती और न ही तुम मेरे बेटे को मुझसे दूर कर पाओगी। इसलिए अब चुपचाप एक अच्छी लड़की बनो और जाकर रेस्ट करो, क्योंकि तुम मेरे बेटे के लिए किसी खिलौने की तरह हो; वो सारा दिन उस पर एक्सपेरिमेंट करेगा और जब वो उससे बोर हो जाएगा, तो तुम्हारे साथ आकर खेलेगा और फिर अगले दिन वो काम में लग जाएगा। अब तुम्हारी और उसकी जिंदगी इसी तरह होने वाली है।" इसी के साथ विरांश मुस्कुराया और वहां से चला गया। मिस्टर मेहरा भी विरांश के पीछे चले गए, लेकिन वहीं खनक के कदम लड़खड़ा गए। वो जमीन पर गिर पड़ी, उसकी आंखों से आंसू गिरने लगे।





















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