
वैदेही के चेहरे पर सन्नाटा छा गया और उसकी आंखों में हैरानी के साथ-साथ गुस्सा भी था। उसने राघव के हाथ को झटकते हुए कहा, "राघव, मेरे भाई! तुम्हें एहसास भी है तुम क्या बोल रहे हो? क्या तुम ऐसी लड़की से शादी करने जा रहे हो जिसकी कोई इज्जत नहीं है? जिसका कोई खानदान नहीं है? तुम आखिर ऐसे किसी राह चलती लड़की के दीवाने कैसे हो सकते हो? अब तो मुझे उस लड़की से मिलना ही पड़ेगा। बताओ मुझे, कब मीटिंग फिक्स करवा रहे हो?"
राघव ने एक गहरी सांस ली और जवाब दिया, "मैं कल मिलवाऊंगा, पर उससे पहले आपको कुछ और बातें जान लेनी चाहिए।"




















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