
कॉटेज का अंधेरा कमरा, और इस वक्त वहाँ साशा की चीखने-चिल्लाने की आवाज़ें गूँज रही थीं। उसके हाथ-पैर बंधे हुए थे और वो आपा खोए हुए चिल्ला रही थी, "मिस्टर दावंश! मिस्टर दावंश! ये क्या बदतमीजी है? आप ऐसा कैसे कर सकते हैं? मुझे पता है आप मुझसे प्यार नहीं करते, आप किसी और से शादी करने जा रहे हैं, पर इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं कि आप मुझे इस तरह कैद रखेंगे!"
वो गुस्से में कांपते हुए बोली, "देखिए मिस्टर दावंश, मैं आपको पहले ही warn कर देती हूँ, अगर आपने मुझे नहीं खोला, तो मैं सच में भूल जाऊंगी कि मैंने कभी आपसे प्यार भी किया था। मैं आपको कभी माफ नहीं करूँगी! प्लीज़, मुझे छोड़िए, मेरे हाथ-पैर खोलिए!"




















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