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तड़प, बेचैनी,बचपन का राज, मौत

इधर दूसरी तरफ,

रूहानिका की आंख खुली। उसने दर्द में अपनी कमर को पकड़ा। तभी उसकी नजर Bed के दूसरे साइड गई, जहां कोई भी नहीं था और उसके लिए ये कोई नई बात नहीं थी। उसने हमेशा की तरह अपनी आंखें बंद की और गहरी सांस लेकर बोली, "पता नहीं कब तक मेरी जिंदगी ऐसे ही चलने वाली है। अब तो मुझे अपनी जिंदगी से ही नफरत होने लगी है। ऐसा लगता है कि ऐसी जिंदगी को मुझे बहुत पहले ही खत्म कर देना चाहिए था।"

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