
इधर दूसरी तरफ,
कमरे में जमीन पर बैठी अंतरा इस वक्त जमीन पर पड़े प्रेगनेंसी किट को देख रही थी। उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे। इस वक्त उसके चेहरे का रंग पीला पड़ा हुआ था। वह सिसकते हुए बोली, "मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इस तरह प्रेग्नेंट हो जाऊंगी। मैंने हमेशा से एक बहुत ही सिंपल जिंदगी के सपने देखे थे, जहां मैं पढ़-लिखकर एक अच्छी कंपनी में नौकरी करती, अपने बाबा के सपने को पूरा करती और अपने अनाथालय के बच्चों को यहां से बाहर निकालकर एक बेहतर जिंदगी देती। लेकिन अब सब कुछ बर्बाद हो गया, सब कुछ पल भर में तबाह हो गया। मुझे तो अभी भी यकीन नहीं हो रहा है कि मैं प्रेग्नेंट हूं और वह भी एक ऐसे इंसान के हाथों जो मुझसे प्यार ही नहीं करता और न मैं उससे प्यार करती हूं। उसने मेरे साथ उस सफर में जबरदस्ती की थी और मेरे पेट में उसके जबरदस्ती की निशानी है।"




















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