
शाम का वक्त था।
क्लासरूम के कोने में अंतरा अपने पैरों के बीच अपना सिर छुपाए बैठी थी। उसकी सिसकियां गूंज रही थीं, वो फूट-फूटकर रो रही थी। वहीं पास ही विंडो के पास खड़ा दानिश सिगरेट पी रहा था, उसके चेहरे पर कोई इमोशन नहीं था। थोड़ी देर बाद उसने सिगरेट को अपने जूते के नीचे मसलते हुए कहा, "मैं तुम्हें तुम्हारे घर ड्रॉप कर रहा हूं, चलो मेरे साथ।"




















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