
ध्वनि कमरे में आई और तुरंत बेड पर गिर पड़ी।
उसकी आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे। वो खुद से बड़बड़ाई, "क्या हो रहा है मुझे? मुझे ऐसे नहीं रोना चाहिए, पर मुझे बहुत बुरा लग रहा है, तकलीफ हो रही है। मुझे वो अनाउंसमेंट नहीं सुननी चाहिए थी। काश मैं इस पार्टी में ही नहीं आती, तो आज मुझे इतनी तकलीफ नहीं होती।" वो रोए जा रही थी, तभी दरवाजे पर आहट हुई। एक आवाज आई, "तुम्हें रोने की जरूरत नहीं है।"




















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