
ऑस्ट्रेलिया में रात का समय था और कमरे में अदिति की आवाज़ गूँज रही थी।
तभी अदिति ने वीरांश को खुद से दूर धक्का देते हुए कहा, "बस करो वीरांश! तुम कितने घंटों से ये कर रहे हो? क्या अभी भी तुम्हारा मन नहीं भरा? मैं पूरी तरह थक चुकी हूँ। जब भी तुम मेरे साथ नॉन-स्टॉप होते हो, मुझे पुराने वीरांश की याद आ जाती हैऐसा लगता है कि तुम कभी बदले ही नहीं।"





















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