
इधर दूसरी तरफ,
शाम का वक्त हो चला था। गार्डन में इस वक्त साशा सोफे पर बैठी हुई थी। कामिनी उससे बहुत सारी बातें कर रही थी, जिसे साशा हंसते-मुस्कुराते हुए सुन रही थी। तभी कामिनी ने कहा, "और तुम्हें पता है बेटा, दावंश बचपन में बहुत ही ज्यादा रोता था। तब सब इसे रोने वाला बच्चा बुलाते थे और ये नाम सुनकर वो बहुत ज्यादा चिढ़ जाता था। फिर रोते हुए मेरे पास आता था। मुझे मजबूरी में सबको डांटना पड़ता था।"




















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