
लिफ्ट के पास गिरी एंजेल दर्द में तड़प रही थी।
वो जोर-जोर से चिल्लाई जा रही थी, लेकिन कोई भी उसकी आवाज वहां सुनने वाला नहीं था। वो वहीं जमीन पर ही बिल्कुल कसमसाने लगी, "वैराग्य! वैराग्य, कहां हैं आप? मुझे बहुत दर्द हो रहा है। वैराग्य, प्लीज जल्दी आइए, मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकती। वैराग्य, मैं मर जाऊंगी, वैराग्य प्लीज जल्दी आइए!"




















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