
दूसरी तरफ वार्ड में,
एंजेल का चेहरा इस वक्त पीला पड़ा हुआ था। वो आंखें बंद करके चुपचाप लेटी हुई थी, उसका बेटा इस वक्त उसके करीब ही सोया हुआ था। तभी दरवाजा खुला और वैराग्य अंदर की तरफ आया। वैराग्य के आने से एंजेल की आंखें खुल गई और वो तुरंत बोली, "मेरा बेटा कहां है? मेरा दूसरा बच्चा आप लेकर क्यों नहीं आए? वैराग्य , आपने कहा था ना कि आप उसे लेकर आएंगे, तो फिर कहां है मेरा बेटा?" कहते हुए उसकी आवाज कांप रही थी और आंखों में आंसू भी आ चुके थे।




















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