
स्वराली जैसे ही कमरे के अंदर पहुँची,
एक सेकंड के लिए वो चारों तरफ देखकर अपनी जगह पर ही खड़ी रह गई। उसे कुछ भी समझ नहीं आया। वो कमरा पूरी तरह खाली था। वो confusion में बोली, "ये सब क्या है? यहाँ तो कुछ है ही नहीं! मैं यहाँ इसलिए आई थी जिससे कि मुझे कुछ पता चल सके, पर यहाँ तो कुछ भी पता नहीं चल रहा है। ये पूरा रूम तो एकदम plain है।"




















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